रतिवल्लभ पाक मतलब शरीर का शक्तिशाली बूस्टर :

आयुर्वेद में एक से बढ़ कर एक ऐसे दिव्य योग उपलब्ध है जिनका सेवन करके शरीर में शक्ति का संचार किया जा सकता है। ऐसी ही एक दिव्य औषधि है ‘रतिवल्लभ पाक’ इसका सेवन करने पर खोयी हुइ शक्ति भी वापस आती है और संचित शक्ति शरीर में बनी रहती है।

रतिवल्लभ पाक के अद्भुत फायदे :

बलवीर्य वर्धक शीघ्रपतन मेंबहुत प्रभावी पुष्टिकारक स्तम्भन शक्ति बढ़ाने वाला किसी भी मधुमेह के अतिरिक्त अन्य प्रमेह के लिए उत्तम है  यह सभी प्रकार के वातजन्य रोगों में वात विकार नष्ट करने वाला और शक्ति प्रदायक।

रतिवल्लभ पाक बनाने के लिए आवश्यक सामग्री :

  1. गोंद बबूल 500 ग्राम,
  2. सौंठ 100 ग्राम,
  3. पिप्पर (या पीपल ) 50 ग्राम
  4. पीपरामूल 50 ग्राम,
  5. लौंग+जायफल+ जावित्री+मोचरस+शुद्ध शिलाजीत (प्रत्येक 25 ग्राम मात्रा )
  6. काली मिर्च+दालचीनी+तेजपत्ता+नागकेसर+छोटी इलायची +प्रवाल भस्म+लौह भस्म+अभ्रक भस्म+वंग भस्म (प्रत्येक 10 ग्राम)
  7. केशर 5 ग्राम
  8. देशी घी (भैंस के दूध का) 300 ग्राम
  9. शक्कर 2 किलो
  10. गुलाब जल शुद्ध 20 ml
  11. बादाम भिगो कर छिलका निकला हुआ+पिस्ता कटा हुआ+काजू कटा+किशमिश+नारियल कटा हुआ (सभी आवश्यकतानुसार)
  12. चांदी का शुद्ध वरक चार से छः

रतिवल्लभ पाक बनाने की विधि :

  • सर्वप्रथम गुलाब जल में केसर को भिगो कर रख दें और पांच घंटे बाद अच्छे से घोटाई कर लें।
  • अब गोंद को ठीक से साफ करके कढा़ई में घी गर्म करें और उसमें गोंद को तलकर निकाल लें और ठंडा करके पीस लें।
  • सौंठ, पिप्पर व पीपलामूल को बारीक पीस छानकर रख लें।
  • काली मिर्च+दालचीनी+तेजपत्ता+नागकेसर+छोटी इलायची को एक साथ कूट-पीसकर बारीक करके छान लें और अलग रख दें।
  • प्रवाल भस्म+लौह भस्म+अभ्रक भस्म+वंग भस्म (प्रत्येक 10 ग्राम) को साफ स्वच्छ खरल में डालकर घुटाई करके रख लें (ऐसा करते समय खरल बिलकुल सुखी हो)।
  • लौंग+जायफल+ जावित्री+मोचरस+शुद्ध शिलाजीत (प्रत्येक 25 ग्राम मात्रा ) को महीन पीस कर अच्छे से घोटाई कर लें।
  • बादाम, पिस्ता, किशमिश, काजू नारियल सब बारीक कटे हुए तैयार कर लें।
  • किसी कडाही आदि में 2 किलो शक्कर लेकर एक तार की चाशनी बनायें एक इसमें तले हुए गोंद और सौंठ, पिप्पर व पीपलामूल आदि तीनों का चूर्ण मिलाकर चाशनी में डाल दें और आंच धीमी कर दें।
  • अब घोंटी हुई प्रवाल भस्म+लौह भस्म+अभ्रक भस्म+वंगभस्म डालकर धीरे धीरे चलते रहें रहें।
  • चाशनी थोड़ी गाढ़ी और जमने लायक हो जाए, तब नीचे उतार कर कुछ ठंडा होने पर घोंटा हुआ लौंग+जायफल+ जावित्री+मोचरस+शुद्ध शिलाजीत का चूर्ण डालकर धीरे धीरे हिलाते रहें और गुलाबजल में घोंटा हुआ केशर डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
  • अब इसमें चांदी वरक मिला दें और कुछ देर चलाकर किसी ट्रे आदि में घी लगाकर इसे फैलाकर जमा दें दें और कटे हुए मेवे फैलाकर डाल दें। जब यह पाक जम जाए, तब काटकर किसी कांच के बर्तन में सुरक्षित कर लें।

रतिवल्लभ पाक को सेवन करने की विधि :

अपनी पाचन शक्ति के अनुसार 25 ग्राम से 50 ग्राम वजन में, सुबह खाली पेट खूब चबा-चबाकर खाएं और ऊपर से मीठा गुनगुना दूध पियें।

कृपया ध्यान दे :

मधुमेह के रोगी इससे बचें या डॉक्टर की सलाह से लें। यदि पाचन शक्ति अच्छी न हो तो उसे अवश्य बढ़ाने के उपाय करें अन्यथा इस बहुमूल्य औषधि का पूरा लाभ नहीं मिलेगा। इसे बच्चे बूढ़े जवान स्त्री पुरूष सभी ले सकते है बस मात्रा का ध्यान रखें। कोशिश करें की सर्दी के मौसम में ही सेवन करें बहुत अधिक गर्मीं में इसका सेवन नहीं करें स्वाभाव से यह योग उष्ण प्रकृति का है।

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रतिवल्लभ पाक मतलब शरीर का शक्तिशाली बूस्टर : आयुर्वेद में एक से बढ़ कर एक ऐसे दिव्य योग उपलब्ध है जिनका सेवन करके शरीर में शक्ति का संचार किया जा सकता है। ऐसी ही एक दिव्य औषधि है 'रतिवल्लभ पाक' इसका सेवन करने पर खोयी हुइ शक्ति भी वापस आती...